आजादी के बाद भारत में बहुत कुछ बदला लेकिन नहीं बदले मुस्लिम मन और मुद्दे ?
महापुरुष कुल विभूषित वीर भूमि भारत ने आजादी के बाद चुनौतियों को अवसर का पर्याय बनाकर प्रजातांत्रिक मूल्यों को विश्व के समक्ष आस्था और अध्ययन हेतु नए कलेवर में प्रस्तुत किया। राष्ट्र ने सेवा क्षेत्र,कृषि क्षेत्र का विस्तार बुनियादी ढांचे के साथ किया, निरंतर वैज्ञानिक उपलब्धियां और शैक्षिक प्रगति प्राप्त की लेकिन कतिपय कारणों से चिकित्सा जगत में मांग और पूर्ति में औसत दर्जे की कमी को नजरंदाज नहीं किया जा सकता है।इसका यह मतलब भी नहीं है कि चिकित्सा क्षेत्र में काम नहीं हुआ विकास नहीं हुआ,हुआ लेकिन अनवरत जनसंख्यीय विकास के अनुरूप नहीं हुआ। दुर्भाग्यवश स्वतंत्र और गणतंत्र भारत के साक्षी आधार स्तंभ, भूमिका पुंज महापुरुष असमय काल कलवित होकर इतिहास बनते गए,तत्कालीन क्रूर राजनीति के खूनी पंजे अध्ययन का विषय हैं। जाने-अनजाने हम अपनी वैदिक संस्कृति से सुदूर होकर पाश्चात्य संस्कृति का अंधानुकरण करते चले आ रहे हैं,जीवन मूल्यों की उपेक्षा और नैतिक पतन भी हमारी उन्नति के साथ कदमताल कर रही है,अभिशप्त राजनीति,सत्तासुख व वैभवी विलासिता ने और भ्रष्ट नौकरशाही ने महापुरुषों के त्याग और बल...