आरक्षण!का स्वरूप
आरक्षण! आरक्षण का राजनीति प्रेरित वर्तमान स्वरूप तमाम विसंगतियों का कारक है और प्रतिभाओं का भक्षक सिद्ध हो रहा है परिणामस्वरूप तमाम योजनाओं के चलते हमारा देश अपेक्षित विकास पैमाने में कहीं नजर नही आ रहा है कम से कम योजनाओं की लागत के अनुसार तो कतई नही निश्चित रूप से यह आरक्षण रूपी महामारी राष्ट्रीय एकता,विकास और सद्भाव के लिए आत्महंता की अप्रिय इबारत लिख रही है,गैर आरक्षित श्रेणी में आक्रोश जन्मना स्वाभाविक है जोकि भावी भारत के लिए अशुभ है जरा सोचिए आरक्षण के लाभार्थी योग्यता के अभाव में भला कैसे अपनी जिम्मेवारियों का निर्वाहन कर सकते ?और प्रताड़ित योग्यता कहां अपना दम तोड़ेगी? यह बात राष्ट्रहित में आरक्षित श्रेणियों को सोचनी चाहिए मतलब व्याप्त विसंगतियों वो स्वयं को चाहकर भी अलग नही कर सकते @ आरक्षण ! आरक्षण! आरक्षण! हम स्वयं से और तमाम सर्वणों से मिलकर यह जानने का प्रयास किए कि क्या कभी हमारे बाप -दादा इतने सक्षम और बाहुबली थे ?कि तथाकथित गैर सर्वणों का शोषण...